कुछ खट्टा कुछ मीठा लेकर घर आया।
मैं अनुभव जीवन का लेकर घर आया।
खेल-खिलौने भूल गया सब मेले में
वो दादी का चिमटा लेकर घर आया।
होमवर्क का बोझ अभी भी सर पर है
जैसे तैसे बस्ता लेकर घर आया।
उसको उसके हिस्से का आदर देना
जो बेटी का रिश्ता लेकर घर आया।
कौन उसूलों के पीछे भूखों मरता
वो भी अपना हिस्सा लेकर घर आया।
Tuesday, November 11, 2014
कुछ खट्टा कुछ मीठा लेकर घर आया / ओमप्रकाश यती
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