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Thursday, November 13, 2014

मिस्टर के की दुनिया: पेड़ और बम-५ / गिरिराज किराडू

उसे रोज याद दिलाने पड़ते हैं
कवि के कर्तव्य
कवि भाषा में नहीं
उसकी शर्म में रहता है

गिरीराज किराडू

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