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Tuesday, November 18, 2014

इस में ये दश्त था / ख़ालिद कर्रार

इस में ये दश्त था
इस दश्त में
मख़्लूक कब वारिद हुई
ख़ुदा मालूम
लेकिन
सब बड़े बूढ़े ये कहते हैं
उधर एक दश्त था
जाने क्यूँ उन को यहाँ
लम्बी क़तारों
शहर की गुंजान गलियों
दफ़्तरों
शाह-राहों
रास्तों और रेस्तोरानों
जलसे जुलूसों
रेलियों और
ऐवाना हा-ए-बाला-ओ-ज़िरीं में
ख़ुश-लिबासी के भरम में
नाचती वहशत नज़र आती नहीं

ख़ालिद कर्रार

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