अँधेरों पर भारी उजाले रहेंगे
तो हाथों में सबके निवाले रहेंगे
न महफ़ूज़ रह पाएगी अपनी अस्मत
जुबाँ पर हमारी जो ताले रहेंगे
ग़मों से भरी ज़िन्दगी जी रहे हैं
मगर भ्रम ख़ुशी का ही पाले रहेंगे
यूँ आँसू बहाने से कुछ भी न होगा
अगर दिल हैं काले तो काले रहेंगे
बढ़ाते रहोगे अगर हौसला तुम
तो पतवार हम भी सँभाले रहेंगे
Thursday, November 20, 2014
अँधेरों पर भारी उजाले रहेंगे / अल्पना नारायण
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