तेरे होटाँ के हुके़ में थे दिला मुंज कूँ दवा
मेरे दर्मां कूँ सदा तेरी शिफ़ा थे है शिफ़ा
नयन झलकार तेरी बिजली नमन जब झमकेगी
दिश्ट थे मंुज शौक़ का मेंह पड़ के हुआ सब ही हवा
क्या ग़रज़ तुज कूँ ये बहसाँ सूँ पिला मय साक़ी
ग़म पछीं ऐश ख़ुशी का है सफ़ा हौर सफ़ा
वाज़ तेरे सूँ मआनी बँधिया है दिल या रब
करो आमीन नबी ओ अली थे उस की दुआ
Saturday, November 8, 2014
तेरे होटाँ के हुके़ में थे दिला मुंज कूँ दवा / क़ुली 'क़ुतुब' शाह
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