ख़्वाब[1]
वो चाँद जो मेरा हमसफ़र[2]था
दूरी के उजाड़ जंगलों में
अब मेरी नज़र से छुप चुका है
इक उम्र से मैं मलूलो-तन्हा[3]
ज़ुल्मात[4] की रहगुज़ार[5] में हूँ
मैं आगे बढ़ूँ कि लौट जाऊँ
क्या सोच के इन्तज़ार[6] में हूँ
कोई भी नहीं जो यह बताए
मैं कौन हूँ किस दयार[7] में हूँ
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