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Thursday, November 13, 2014

मात देना नहीं जानतीं / केदारनाथ अग्रवाल

घर की फुटन में पड़ी औरतें
ज़िन्दगी काटती हैं
मर्द की मौह्ब्बत में मिला
काल का काला नमक चाटती हैं

जीती ज़रूर हैं
जीना नहीं जानतीं;
मात खातीं-
मात देना नहीं जानतीं

केदारनाथ अग्रवाल

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