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Monday, November 10, 2014

आस / कविता मालवीय

तुम्हारा क्या ख्याल है!
नेपथ्य में काफी संभावनाएं हैं
नेपथ्य में पलने वाले दर्द
जब उघड़ जाते हैं तो

अनसुने, अनदेखे नहीं रह जाते हैं,
उर्मिला के निशब्द दर्द
सीता के कथनीय दुःख से
ज्यादा शोर मचाते हैं,
कर्ण के शांत आक्रोश स्वर
अर्जुन के सस्वर वीर राग पर
ज्यादा भारी पड़ जाते हैं

हम तुम भी नेपथ्य में ही खड़े हैं

कविता मालवीय

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