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Monday, March 17, 2014

अपनी बात / आलोक धन्वा

कितने दिनों से रात आ रही है
जा रही है पृथ्‍वी पर
फिर भी इसे देखना
इसमें होना एक अनोखा काम लगता है

मतलब कि मैं
अपनी बात कर रहा हूँ।


(1996)

आलोक धन्वा

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