Pages

Friday, March 21, 2014

शब्द / कविता मालवीय

अर्थ की नक्काशी पर आँख फोड़ते सुनार शब्द
राजनीति में नीयत की सूनी गोद के बाँझ शब्द
पुरानी लकीरों को पीटते व हाँफते लुहार शब्द
बुढ़ापे में औलाद का मुँह ताकते अनाथ शब्द
रिश्तों की सरहद के घुसपैठिये सेंधमार शब्द
बचपन के अबोध रंगीन जहां के स्याह शब्द
मानसिकता की गंदगी से जूझते बीमार शब्द
परम्पराओं के पिछवाड़े उगते विवाहेतर शब्द
परनिंदा के रससंवेदी चषकों के रसधार शब्द
हर नियमावली के सड़ते नासूर जुगाड़ शब्द

कविता में टूट फूट की मरम्मत करते

मिस्त्री और ठेकेदार शब्द

कविता मालवीय

0 comments :

Post a Comment