ज्योति को दुख ने किया पावन सूर्य कण-कण रक्त से सींचा समय का रथ रथी-सा खींचा प्लव बना पथ, पथ बना प्लावन एक उद्बोधन, खुले तारे एक आश्वासन, बिना हारे चल पड़ा है, चल रहा जीवन
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