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Wednesday, October 15, 2014

जीवन / अरुणा राय

अभी चलेगा , धूल-धुएँ के गुबार,…
और भीड़-भरी सड़क,
के शोर-शराबे के बीच
जब चार हथेलियाँ
मिलीं
और दो जोड़ी आँखें
चमकीं
तो पेड़ के पीछे से
छुपकर झाँकता
सोलहवीं का चांद
अवाक रह गया
और तारों की टिमटिमाती रौशनियाँ
फुसफुसाईं
कि सारी जद्दोजहद के बीच
जीवन
अभी चलेगा !

अरुणा राय

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