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Wednesday, October 15, 2014

नायक नहीं खलनायक हूँ मैं / आनंद बख़्शी

 
री रा रि री री रा र रू
एक होता है नायक और एक होता है खलनायक

नायक खलनायक

नायक नहीं खलनायक है तू ज़ुल्मी बड़ा दुःखदायक है तू
इस प्यार की तुझको क्या कदर इस प्यार के कहां लायक है तू
नायक नहीं खलनायक है ...

नायक खलनायक नायक खलनायक

तेरी तबियत तो रंगीन है पर तू मोहब्बत की तौहीन है
इक रोज तुझको समझ आएगी लेकिन बहुत देर हो जाएगी
नायक नहीं खलनायक है ...

खुद को तराज़ू में तौला नहीं सच खुद से भी तूने बोला नहीं
कितने खिलौनों से खेला है तू अफ़सोस फिर भी अकेला है तू
नायक नहीं खलनायक है ...

जी हाँ मैं हूँ खलनायक

नायक नहीं खलनायक है तू
नायक नहीं खलनायक हूँ मैं ज़ुल्मी बड़ा दुःखदायक हूँ मैं
है प्यार क्या मुझको क्या खबर बस यार नफ़रत के लायक हूँ मैं
नायक नहीं खलनायक हूँ ...

तेरी तबियत तो रंगीन है पर तू मोहब्बत की तौहीन है

कुछ भी नहीं याद इसके सिवा न मैं किसी का न कोई मेरा
जो चीज़ मांगी नहीं वो मिली करता मैं क्या और बस छीन ली
मैं भी शराफ़त से जीता मगर मुझको शरीफ़ों से लगता था डर
सबको पता था मैं कमज़ोर हूँ मैं इसलिए आज कुछ और हूँ
नायक नहीं खलनायक हूँ ...

कितने खिलौनों से खेला है तू अफ़सोस फिर भी अकेला है तू

बचपन में लिखी कहानी मेरी कैसे बदलती जवानी मेरी
सारा समन्दर मेरे पास है एक बूंद पानी मेरी प्यास है
देखा था माँ ने कभी प्यार से अब मिट गई वो भी संसार से
मैं वो लुटेरा हूँ जो लुट गया माँ का आंचल कहीं छुप गया
नायक नहीं खलनायक हूँ ...

आनंद बख़्शी

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