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Thursday, October 9, 2014

चुप हो तुम / अरुणा राय

चुप हो तुम
तो
हवाएं चुप हैं

खामोशी की चील
काटती है
चक्कर
दाएं... बाएं

लगाती हूं आवाज...
 
पर
फर्क नहीं पड़ता

बदहवासी

पैठती जाती है
भीतर...

अरुणा राय

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