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Friday, November 29, 2013

वही है जुनूँ है वही क़ूच-ए-मलामत है / फ़राज़


वही जुनूँ[1]है वही क़ूच-ए-मलामत [2]है
शिकस्ते-दिल[3]प’ भी अहदे-वफ़ा [4]सलामत[5]है

ये हम जो बाग़ो-बहाराँ[6]का ज़िक्र[7]करते हैं
तो मुद्दआ[8]वो गुले-तर[9]वो सर्वो-क़ामत[10]है

बजा ये फ़ुर्सते-हस्ती[11]मगर दिले-नादाँ[12]
न याद कर के उसे भूलना क़यामत[13]है

चली चले यूँ ही रस्मे-वफ़ा[14]-ओ-मश्क़े-सितम[15]
कि तेगे़ -यारो-सरे-दोस्ताँ[16]सलामत है

सुकूते-बहर[17]से साहिल [18]लरज़[19]रहा है मगर
ये ख़ामुशी किसी तूफ़ान की अलामत [20]है

अजीब वज़्अ[21]का ‘अहमद फ़राज़’ है शाइर
कि दिल दरीदा[22]मगर पैरहन[23]सलामत है

अहमद फ़राज़

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