जहाँ नदियाँ समुद्र से मिलती हैं
वहाँ मेरा क्या है
मैं नहीं जानता
लेकिन एक दिन जाना है उधर
उस ओर किसी को जाते हुए देखते
कैसी हसरत भड़कती है !
(1996)
Showing posts with label हसरत / आलोक धन्वा. Show all posts
Showing posts with label हसरत / आलोक धन्वा. Show all posts
Tuesday, October 8, 2013
हसरत / आलोक धन्वा
Subscribe to:
Posts
(
Atom
)

