दिल हमारा लापता है शाम से
कर रहा है क्या ? गया किस काम से
दर्द ले कर दिल हमारा ले लिया
हो गए दोनों बड़े अंजाम से
लाश में ही जान अब तो डालिए
एक भी बाक़ी न क़त्लेआम से
आप हों चाहे न जितनी दूर क्यों ?
जी रहे हम आपके ही नाम से
ज़िंदगी गुज़री मुसीबत से भरी
मर गए हम तो बहुत आराम से
Wednesday, February 5, 2014
दिल ही तो है / आरसी प्रसाद सिंह
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