Pages

Saturday, January 11, 2014

तुम निर्वस्त्र नहीं हो मनोरमा / अनिता भारती

छोटी सुन्दर
काली धौली आँखों वाली
गौरवर्णा, श्यामवर्णा
यौवन से गदराई
या फिर कृशरूपा
तुम्हें निर्वस्त्र किया देश रक्षकों ने
पर तुम निर्वस्त्र नहीं हो

तुम्हें वस्त्र पहनाने निकल आयी है
रणभूमि में
अनेक निर्वस्त्राएँ
तुम्हारे नंगे
क्षत-विक्षत शरीर ने
जगाई है क्रान्ति की अखण्ड लौ
जो रक्षकों-भक्षकों को
सालों-साल याद दिलायेगी
कि एक थी मनोरमा...

अनिता भारती

0 comments :

Post a Comment