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पेड़-7 / अशोक सिंह
मैं फ़तह-ए-ज़ात मंज़र तक न पहुँचा / अहमद शनास
किसान / गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'
भिखारी / उत्पल बैनर्जी
है मोल-भाव में बाज़ार मे है साथ मेरे / ख़ालिद कर्रार
वो ख़्वाब तलब-गार-ए-तमाशा भी नहीं है / कबीर अजमल
नाम पर मज़हब के ठेकेदारियाँ इतनी कि बस / उदयप्रताप...
वसंत / एकांत श्रीवास्तव
मसला ये तो नहीं की सिन-रसीदा कौन था / अशअर नजमी
बालू से चिनी जाएगी दीवार कहाँ तक / कांतिमोहन 'सोज़'
विपर्यय / अज्ञेय
तुम्हारे ग़म का मौसम है अभी तक / अनीस अंसारी
फ़िसादात / अर्श मलसियानी
हाँ सुकन्या / कुमार रवींद्र
उमर में डूब जाओ / अभिज्ञात
लाल है परचम नीचे हँसिया / कांतिमोहन 'सोज़'
टिड्डियों सा दल बाँधे लौटेंगे वे / उज्जवला ज्योति ...
व्यक्तिगत / आशीष जोग
जाको धन, धरती हरी / गिरिधर
चाँद, पानी और सीता / अरुण देव
नहीं है अगर उन में बारिश हवा / ख़ालिद महमूद
किसने बचाया मेरी आत्मा को / आलोक धन्वा
स्वप्न / उत्तमराव क्षीरसागर
स्वार्थ का सुख और है, सेवा का सागर और है / गिरिराज...
पेट / उदयन वाजपेयी
प्रभु मेरी दिव्यता में / अनीता वर्मा
इस से आगे तो बस ला-मकाँ रह गया / अंजुम सलीमी
दिलों की ओर धुआँ सा दिखाई देता है / अहमद मुश्ताक़
रफ़्ता रफ़्ता मंज़र-ए-शब ताब भी आ जाएँ / ख़ुशबीर स...
यह पलाश के फूलने का समय है-1 / अनुज लुगुन
मैं खड़ा बीच मझधार किनारे क्या कर लेंगे / अमित
दीमक / इला प्रसाद
मंज़िलें दूर हैं पैर मजबूर हैं / कांतिमोहन 'सोज़'
बच्चा सच्ची बात लिखेगा / कुमार विनोद
कालानमक / गणेश पाण्डेय
झुके हुए दरख्तों के पार / इला कुमार
जाने क्या दुश्मनी है शाम के साथ / 'अना' क़ासमी
क़सम इन आँखों की जिन से लहू टपकता है / अख़्तर अंसारी
ठहर ठहर के मिरा इंतिज़ार करता चल / ग़ुलाम मुर्तज़ा...
फूला है / कैलाश गौतम
बहुरि नहिं / कबीर
ताबे-दीदार जो लाये मुझे वो दिल देना / आसी ग़ाज़ीपुरी
कुहरे की दीवार खड़ी है / कात्यायनी
गाने का अभ्यास / कुमार अनुपम
विवश / उदय भान मिश्र
आँसू / अशोक अंजुम
सन्नाटोँ मेँ स्त्री / ओम पुरोहित ‘कागद’
चिडिय़ाघर में ज़ेबरा की मौत / अनुज लुगुन
अकुशल / कुमार अंबुज
आदमी में / ओम पुरोहित ‘कागद’
सोच रहा है दिन / अश्वघोष
ये जो सूरज है ये सूरज भी कहाँ था पहले / अफ़ज़ल गौह...
होटों पे हँसी आँख में तारों की लड़ी है / 'क़ाबिल' ...
एक हरा जंगल / कुंवर नारायण
पयाम आये हैं उस यार-ए-बेवफ़ा के मुझे / फ़राज़
ऊसर जमीन भी बन सकती है फिर से उपजाऊ 8 / उमेश चौहान
माँ...क्या एक बार फिर मिलोगी? / अंजना भट्ट
नासमझी / आकांक्षा पारे
तस्वीरें / आकांक्षा पारे
मौन हो गए / अजय पाठक
जिसने ख़ून होते देखा / अरुण कमल
जागो रे मज़दूर किसान / कांतिमोहन 'सोज़'
शिव स्तुति / कमलानंद सिंह 'साहित्य सरोज'
डोली में बिठाई के कहार / आनंद बख़्शी
जाड़े की धूप / अरविन्द अवस्थी
हर गाम सँभल सँभल रही थी / 'अदा' ज़ाफ़री
वो तफ़व्वुतें हैं मेरे खुदा कि ये तू नहीं कोई और ह...
काम अब कोई न आएगा बस इक दिल के सिवा / अख़्तर-उल-ईमान
छू जाए दिल को ऐसा कोई फ़न अभी कहाँ / 'अना' क़ासमी
ज़ुबाँ पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई / आनंद बख़्शी
साथ-साथ / केशव तिवारी
कुनबा / अनूप सेठी
किसने सोचा धूपबत्ती राख हो जाती है क्यों / गिरिराज...
अजीब थी वो अजब तरहां चाहता था मैं / उबैदुल्लाह 'अलीम'
कैँधौँ दृग सागर के आस पास स्यामताई / अज्ञात कवि (र...
फ़सल कटाई का गीत / कांतिमोहन 'सोज़'
चाँदो रे... ! / अनुज लुगुन
कि अब वही है साक्षात घटोत्कची वारिस / कुमार मुकुल
दिल ने इक आह भरी आँख में आँसू आए / 'गुलनार' आफ़रीन
बच्चों के बीच / गिरिराज शरण अग्रवाल
घर-गिरस्ती / गिरिराज किराडू
यह अग्निकिरीटी मस्तक / केदारनाथ सिंह
कौन शाएर रह सकता है / अफ़ज़ाल अहमद सय्यद
वो नदी-सी सदा छलछलाती रही / अज़ीज़ आज़ाद
जीवन / कुसुम जैन
मनखान आएगा / अवतार एनगिल
प्रथम किरण / अज्ञेय
दिवाने मन, भजन बिना दुख पैहौ / कबीर
कल और आज / उमा अर्पिता
जानती हैं औरतें / कमलेश
हम ऐसे सोए भी कब थे हमें जगा लाते / अभिषेक शुक्ला
जिंदगी फूस की झोपड़ी / उदयभानु ‘हंस’
मेरी नज़र मेरा अपना मुशाहिदा है कहाँ / 'आसिम' वास्ती
कैटभ सो / केशवदास
दुआ की राख पे मरमर का इत्र-दाँ उस का / अफ़ज़ाल अहम...
रेत / अली मोहम्मद फ़र्शी
देवभाषा / अरुण कमल
अनूठी बातें / अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
किसी दश्त ओ दर से / अब्दुल हमीद
दुख फ़साना नहीं के तुझ से कहें / फ़राज़
हम से जाओ न बचाकर आँखें / अंजना संधीर
खेल बिन बच्चा / अनिरुद्ध नीरव
ख़ैर उनको कुछ न आए / अकबर इलाहाबादी
सब आंखों का तारा बच्चा / कुमार विनोद
करे कोशिश अगर इन्सान तो क्या-क्या नहीं मिलता / अशो...
वो इत्तेफ़ाक़ से रस्ते में मिल गया था मुझे / अख़्त...
नामुमकिन को मुमकिन करने निकले हैं / कविता किरण
नैनन के तारन मै राखौ प्यारे पूतरी कै / केशव.
हिफ़ाज़त में कोई पलता हुआ नासूर लगता है / अशोक आलोक
कौन आएगा यहाँ कोई न आया होगा / 'कैफ़' भोपाली
फगुआ- ढोल बजा दे / अवनीश सिंह चौहान
सबब / उत्तमराव क्षीरसागर
बादलों की चिट्ठियाँ क्या आईं दरियाओं के नाम / अशहर...
या तो हरेक बशर के लिए मय हराम हो / कांतिमोहन 'सोज़'
हुआ प्रवासी / अवनीश सिंह चौहान
आँखे अब पथरायी है बन्द दरीचे खोलो हो / अबू आरिफ़
बाइसे-शौक आजमाते हैं / अमित
वक्त का अकबर / अनीता कपूर
इच्छा थी / अरुण कमल
ये दुनिया इक दुल्हन / आनंद बख़्शी
वादे थे फिर वादे ही वो टूट गए तो क्या कीजे / उपेन्...
लम्बी जुदाई / आनंद बख़्शी
मैं किसके नाम लिखूँ, जो अलम गुज़र रहे हैं / उबैदुल...
दुख उसने / गगन गिल
(एक बार एक गोरे अधिकारी ने रेड इण्डियन्स की ज़मीन...
हस्ती के शजर में जो यह चाहो कि चमक जाओ / अकबर इलाह...
चमकी कहीं जो बर्क तो एहसास बन गई / गणेश बिहारी 'तर...
पर्यटन / कुमार अंबुज
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Sunday, January 26, 2014
जीवन / कुसुम जैन
घूंघर-घूंघर बरसती हैं बूंदें
झूमते हैं पत्ते
पत्ता-पत्ता
जी रहा है
पल-पल को
आने वाले
कल से बेख़बर
कुसुम जैन
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