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Monday, January 13, 2014

खुशबुए गुल / ”काज़िम” जरवली

जब शाम हुई अपने दीये हमने जलाये ,
सूरज का उजाला कभी शब् तक नही पहुंचा ।

जिस फूल मे खुशबु थी उधर सर को झुकाया ,
हर फूल के मै नाम-ओ-नसब तक नही पहुंचा ।।

काज़िम जरवली

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