कुछ सिखाती हैं हमें पेड़ों की हिलती पत्तियाँ
प्यार से आपस में मिलने को मचलती पत्तियाँ
आदमी की क्या है चाहत यह बताता है बसन्त
जितनी झर जाती हैं उतनी ही निकलतीं पत्तियाँ
नीचे बौराई टहनियों की हिफ़ाज़त के लिए
चिलचिलाती धूप में ऊपर की जलती पत्तियाँ
लाल कोंपल, हरा यौवन, पीली पतझर के समीप
उम्र के संग रंग अपना भी बदलती पत्तियाँ
इस लता की कोंपलें थी खाद उसकी हो गई
लड़कियों के पाँव के चिह्नों पे चलती पत्तियाँ
कल यही उपवन का निर्धारित करेगी संविधान
आपके पाँवों के नीचे की कुचलती पत्तियाँ
Wednesday, November 20, 2013
कुछ सिखाती हैं हमें पेड़ों की हिलती पत्तियाँ / उदयप्रताप सिंह
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