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Friday, November 15, 2013

प्रेम-पांच / ओम नागर

प्रेम-
आंधो होता सतां बी
टटोळ ल्ये छै ज्ये
सांस की तताई
पिछाण ल्ये छै ज्ये
प्रीत को असल उणग्यारो।

ओम नागर

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