फूलों के गाँव
फसलों के गाँव
आओ चलें गीतों के गाँव।
महके कोई रह रह के फूल
रेशम हुई राहों की धूल
बहती हुई अल्हड़ नदी
ढहते हुए यादों के कूल
चंदा के गाँव
सूरज के गाँव
आओ चलें तारों के गाँव।
पीपल के पात महुए के पात
आँचल भरे हर पल सौगात
सावन झरे मोती के बूँद
फागुनी धूप सहलाए गात
पीपल की छाँव
निबिया की छाँव
आओ चलें सुख-दुख की छाँव।
नदिया का जल पोखर का जल
मीठी छुवन हर छिन हर पल
गुज़रे हुए बासंती दिन
अब भी नहीं होते ओझल
भटकें नहीं
लहरों के पाँव
आओ चलें रिश्तों की नाव।
Friday, November 15, 2013
गीतों के गॉंव / ओम निश्चल
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