Pages

Thursday, November 21, 2013

ऊसर जमीन भी बन सकती है फिर से उपजाऊ 4 / उमेश चौहान

फसल लहलहाने की आशा नहीं की जा सकती
यदि मिट्टी के सीने पर नमक की जकड़न हो
ऊपर से चाहे जितनी तरलता दी जाय उसे
और चाहे उसमें डाली जाय
कितने भी पोषक तत्वों से भरी खाद
सब कुछ व्यर्थ ही हो जाएगा
तुलसी बाबा कह ही गए हैं
'ऊसर बीज बये फल जथा'।

उपाय तो एक ही है बस कि
चीरा जाय धरती का सीना
गलाया जाय बरसों का जमा नमक
और बहाकर दूर ले जाया जाय उसे नालियों के सहारे
जैसे गुरदे बहा देते हैं खींचकर
शरीर का सारा अपशिष्ट मूत्र की शक्ल में।

जरूरी है अब कि मुक्त किया जाय मिट्टी को
इस खारेपन की त्रासदी से
ताकि उम्मीद की जा सके कि
धरती पर फिर से लहलहा सकती है
हमारे मनचाहे सपनों की फसल।

उमेश चौहान

0 comments :

Post a Comment