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Tuesday, October 22, 2013

ऊसर जमीन भी बन सकती है फिर से उपजाऊ 2 / उमेश चौहान

आज जो जमीन पड़ी है ऊसर
कल तक यही उपजाऊ थी
अतीत की कुछ गलतियाँ -
सब कुछ चुपचाप सह लेने की आदत
उर्वरता का बेहिसाब दोहन
क्षमता का मनमाना शोषण -
जिनके चलते इसके सीने पर जमता चला गया
वाष्पित आँसुओं का ढेर सारा खारापन।

लवणों की कठोर दीवार के नीचे
अभी भी बची है मिट्टी की नैसर्गिक उर्वरता
अभी भी किसी तेजाब से गलाई जा सकती है
यह अभेद्य क्षारीय दीवार
अभी भी यह ऊसर जमीन बन सकती है उपजाऊ।

उमेश चौहान

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