अजब सी छटपटाहट,
घुटन,कसकन ,है असह पीङा
समझ लो
साधना की अवधि पूरी है
अरे घबरा न मन
चुपचाप सहता जा
सृजन में दर्द का होना जरूरी है
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Saturday, January 4, 2014
सृजन का दर्द / कन्हैयालाल नंदन
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