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Friday, December 26, 2014

सरोवर है श्वसन में / ओम प्रभाकर

सरोवर है
शवासन में !

हवा व्‍याकुल
गंध कन्‍धों पर धरे
वृक्ष तट के
बौखलाहट से भरे ।
मूढ़ता-सी छा रही है
मृगों के मन में !

मछलियाँ बेचैन
मछुआरे दुखी
घाट-मंदिर-देवता
सारे दुखी ।
दुखी हैं पशु गाँव में
तो पखेरू वन में ।

सरोवर है
शवासन में !

ओम प्रभाकर