वहाँ
तुम्हारा माथा तप रहा है
बुखार में
मैं बस आँसू में
भीगी कुछ पंक्तियाँ भेजता हूँ यहाँ से
इन्हें माथे पर धरना... ।
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Friday, November 29, 2013
विदेशिनी-2 / कुमार अनुपम
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