Pages

Showing posts with label राजधानी में बैल 1 / उदय प्रकाश. Show all posts
Showing posts with label राजधानी में बैल 1 / उदय प्रकाश. Show all posts

Wednesday, December 24, 2014

राजधानी में बैल 1 / उदय प्रकाश

बादलों को सींग पर उठाए
खड़ा है आकाश की पुलक के नीचे

एक बूँद के अचानक गिरने से
देर तक सिहरती रहती है उसकी त्वचा

देखता हुआ उसे
भीगता हूँ मैं

देर तक ।

उदय प्रकाश