बादलों को सींग पर उठाए
खड़ा है आकाश की पुलक के नीचे
एक बूँद के अचानक गिरने से
देर तक सिहरती रहती है उसकी त्वचा
देखता हुआ उसे
भीगता हूँ मैं
देर तक ।
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Wednesday, December 24, 2014
राजधानी में बैल 1 / उदय प्रकाश
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