Pages

Showing posts with label रती बिन संत / गँग. Show all posts
Showing posts with label रती बिन संत / गँग. Show all posts

Sunday, March 30, 2014

रती बिन साधु, रती बिन संत / गँग

रती बिन साधु, रती बिन संत, रती बिन जोग न होय जती को॥
रती बिन मात, रती बिन तात, रती बिन मानस लागत फीको।
'गंग कहै सुन साह अकब्बर, एक रती बिन पाव रती को॥
एक को छोड बिजा को भजै, रसना जु कटौ उस लब्बर की।

गँग