बीत गये दिन भजन बिना रे।
भजन बिना रे भजन बिना रे॥
बाल अवस्था खेल गँवायो।
जब यौवन तब मान घना रे॥
लाहे कारण मूल गँवायो।
अजहुं न गयी मन की तृष्णा रे॥
कहत कबीर सुनो भई साधो।
पार उतर गये संत जना रे॥
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Friday, February 21, 2014
बीत गये दिन / कबीर
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