परेशां हूँ
जाने कहाँ खो सी गयी हूँ...
खोजती हूँ खुद को
यहाँ/वहां/खुद में/तुम में
हैरां हूँ..
तुम्हारे भीतर भी नहीं हूँ?
रात तुम्हारी नींद को भी टटोला....
नहीं!!!
तुम्हारे ख़्वाबों में भी नहीं
आखिर कहाँ गुम हुई मैं, तुम्हें पाने के बाद...
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Monday, December 29, 2014
तलाश / अनुलता राज नायर
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