कहा करौं वह मूरति जिय ते न टरई।
सुंदर नंद कुँवर के बिछुरे, निस दिन नींद न परई॥
बहु विधि मिलन प्रान प्यारे की, एक निमिष न बिसरई।
वे गुन समुझि समुझि चित नैननि नीर निरंतर ढरई॥
कछु न सुहाय तलाबेली मनु, बिरह अनल तन जरई।
'कुंभनदास लाल गिरधन बिनु, समाधान को करई।
Showing posts with label कहा करौं वह मूरति जिय ते न टरई / कुम्भनदास. Show all posts
Showing posts with label कहा करौं वह मूरति जिय ते न टरई / कुम्भनदास. Show all posts
Thursday, December 25, 2014
कहा करौं वह मूरति जिय ते न टरई / कुम्भनदास
Subscribe to:
Posts
(
Atom
)

