एक
सरोज के लिए योग्य वर खोजना आसान नहीं था
ब्राह्मणत्व की आग से भयंकर थी कविता की आग
अन्त में कवि अमर हो जाता है एक पिता रोता पीटता
मर खप जाता है
दो
Showing posts with label कला-दर्शन / असद ज़ैदी. Show all posts
Showing posts with label कला-दर्शन / असद ज़ैदी. Show all posts
Thursday, October 23, 2014
कला-दर्शन / असद ज़ैदी
Subscribe to:
Posts
(
Atom
)

