Pages

Showing posts with label एक पारिवारिक प्रश्न / केदारनाथ सिंह. Show all posts
Showing posts with label एक पारिवारिक प्रश्न / केदारनाथ सिंह. Show all posts

Saturday, November 29, 2014

एक पारिवारिक प्रश्न / केदारनाथ सिंह

छोटे से आंगन में
माँ ने लगाए हैं
तुलसी के बिरवे दो

पिता ने उगाया है
बरगद छतनार

मैं अपना नन्हा गुलाब
कहाँ रोप दूँ!

मुट्ठी में प्रश्न लिए
दौड़ रहा हूं वन-वन,
पर्वत-पर्वत,
रेती-रेती...
बेकार

(1957)

केदारनाथ सिंह