Pages

Friday, December 5, 2014

मैं कोई छूट नहीं पा सकता / केशव तिवारी

वे जिस दिन जागेंगे
मुझसे भी मांगेंगे हिसाब
मेरे कहे हर शब्द को
रखेंगे कटघरे में
इन पर कविता लिखकर
मैं कोई छूट नहीं पा सकता

मित्रों ! यदि कलम को सलीब से
अपनी गर्दन को बचाने का
औजार बना रहे हो
तो तुम तलवार को
ढाल की तरह इस्तेमाल करना चाहते हो
और याद रखना ढाल कभी भी
तलवार नहीं बन सकती |

केशव तिवारी

0 comments :

Post a Comment