नए अंदाज़ से दाख़िल वो हमलावर यहां होगा I
वो अपने घर में होगा मौत का दफ़्तर यहां होगा II
छुरों की धार पैनी कर रहे हैं सारे मां जाए
भला तू देख भी पायेगा जो मंज़र यहां होगा I
मज़ा ले लेके फिर सारे पड़ोसी हाथ सेकेंगे
कुछ इस अंदाज़ से रौशन हमारा घर यहां होगा I
उक़ाब एक दूसरी तक़सीम की करते हैं तय्यारी
बशर का धड़ वहां होगा अगरचे सर यहां होगा I
न देखो सिर्फ़ थैली उसकी मोटी तोंद भी देखो
ये मत भूलो वो अपने पेट की ख़ातिर यहां होगा I
वतन की फ़िक्र कर नादां मुसीबत आनेवाली है
वतन मिट जाएगा तो सोच क्या फिर तू यहां होगा II
Monday, October 13, 2014
नए अंदाज़ से दाख़िल वो हमलावर यहां होगा / कांतिमोहन 'सोज़'
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