अगर दौलत भी शामिल हो तो दौलत भी कमाती है ।
वगर्ना सिर्फ़ मेहनत सिर्फ़ मेहनत ही कराती है ।
सवेरे दस बजे से रात के बारह बजाते हो,
हमें भी भूख लगती है हमें भी नींद आती है ।
अक़ीदे के कुएँ से उसको बाहर खींचता हूँ जब,
न जाने क्यों मेरे हाथों से रस्सी छूट जाती है ।
अगरचे डर है लेकिन आज़माते हैं ये नुस्ख़ा भी,
ज़रा देखें हमारी बेरुख़ी क्या रंग लाती है ।
वो अज़्मत है कि चाहें तो क़दमबोसी करे दुनिया,
मगर इक भूख के आगे वो अज़्मत हार जाती है ।
Sunday, October 12, 2014
अगर दौलत भी शामिल हो तो दौलत भी कमाती है / ओम प्रकाश नदीम
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