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Wednesday, March 12, 2014

अव्यय / अशोक वाजपेयी

उसमें जो अव्यय है
उसी को छूने की चेष्टा करता हूँ:
वह जिसे वह भी
चाहे तो नष्ट नहीं कर पाएगी।

अशोक वाजपेयी

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