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Saturday, March 8, 2014

तुम (हाइकु) / अशोक कुमार शुक्ला

 (1)
तुम आये तो
महकी फुलवारी
मायूसी हारी
(2)
हरारत है
आलिंगन तुम्हारा
पिघला तन
(3)
तेरी आहट
गुनगुनी धूप सी
माह पूस की

अशोक कुमार शुक्ला

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