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Sunday, February 16, 2014

हम भी शराबी, तुम भी शराबी / अली सरदार जाफ़री

हम भी शराबी, तुम भी शराबी
छलके गुलाबी, छलके गुलाबी
तक़्दीर दिल कि ख़ाना ख़राबी
जब तक है जीना खुश हो के जी लें
जब तक है पीना जी भर के पी लें
हरत न कोइ रह जाये बाक़ी
कल सुबह के दामन में, तुम होगे न हुम होंगे
बस रेत के सीने पर कुछ नक्श क़दम होंगे
बस रात भर के मेहमान हम हैं
ज़ुल्फ़ों में शब के थोडे से कम हैं
बाक़ी रहेगा सागर न साक़ी

अली सरदार जाफ़री

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