Pages

Tuesday, February 4, 2014

पसीने का रोना / अरुण आदित्य

तरह-तरह के सेंट
तरह-तरह के परफ्यूम
भाँति-भाँति के डियो की धूम
 
अनगिनत रंग-बिरंगी पत्रिकाएँ
रेडियो-टीवी-इंटरनेट-अख़बार
हर जगह मेरे खिलाफ़ इश्तहार
 
अपनी गंध के लिए लड़ता मैं अकेला
मेरे खिलाफ़ इतना बड़ा मेला

अरुण आदित्य

0 comments :

Post a Comment