Pages

Sunday, November 17, 2013

ज़िन्‍दा इंसान हूँ मैं / अरुणा राय

ज़िन्‍दा इंसान हूँ मैं
 
सोहबत
चाहिए तुम्‍हारी
मुकम्‍मल
 
लाश नहीं हूँ
कि
शब्‍दों के फूल
 
चढ़ाते
चली जाओ...।

अरुणा राय

0 comments :

Post a Comment