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Tuesday, November 5, 2013

ये समाँ, समाँ है ये प्यार का / आनंद बख़्शी

 
ये समाँ
समाँ है ये प्यार का
किसी के इंतज़ार का
दिल ना चुराले कहीं मेरा
मौसम बहार का
ये समाँ...

बसने लगे आँखों में
कुछ ऐसे सपने
कोई बुलाए जैसे
नैनों से अपने
नैनों से अपने
ये समाँ...

मिलके खयालों में ही
अपने बलम से
नींद गंवाँई अपनी
मैंने क़सम से
मैंने क़सम से
ये समाँ...

आनंद बख़्शी

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