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Saturday, November 9, 2013

सूखी डाली पर् / मात्सुओ बाशो

(1)
जापानी हाइकु

कारे एदा नि
कारसु नो तोमारिकेरि
आकि नो कुरे।

हिन्दी भावानुवाद

सूखी डाली पर्
काक एक एकाकी
साँझ पतझड़ की।

अज्ञेय

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