सावन आया छाने लगे घोर घन घोर बादल
करते हैं फिर दिल को परेशान चित चोर बादल
जंगल जंगल सनकी हवा बाँस बन झूम उठे
नाचे कूदे गरजे मचाने लगे शोर बादल
ढोलक नक़्क़ारे बाँसुरी झाँझनें बज रही हैं
उस पर ये सत-रंगी धनक बन गए मोर बादल
बिजली का पहलू गुदगुदाया भरीं चुटकियाँ भी
झूमा झटकी कर के दिखाने लगे ज़ोर बादल
दिल में दुःख आँखों में नमी आसमाँ पर घटाएँ
अन्दर बाहर इस ओर उस ओर हर ओर बादल
Saturday, November 9, 2013
सावन आया छाने लगे घोर घन / 'अमीक' हनफ़ी
Subscribe to:
Post Comments
(
Atom
)


0 comments :
Post a Comment