Pages

Monday, November 11, 2013

शरीर / आलोक धन्वा


स्त्रियों ने रचा जिसे युगों में
युगों की रातों में उतने नि‍जी हुए शरीर
आज मैं चला ढूँढने अपने शरीर में।


1995

आलोक धन्वा

0 comments :

Post a Comment