आम तौर पर कुछ भी कहा नहीं जा सकता
उस आदमी के बारे में
वह कितने प्रतिशत अफसर है
कितना आदमी बचा हुआ है
यू हँसता मुस्कराता भी है नाप तौल कर
कृपा भी करता है
बात कर लेता है अच्छी तरह से
एक आशंका सदा उपस्थित रहती है
जाने कब नाराज हो जाये
अब ऐसे समय कभी अफसर कभी आदमी की लहरें
आती-जाती रहती है उसके चेहरे पर
आप कभी बेतक़ल्लुफ़ नहीं हो सकते
कभी-कभी वह बहुत ज्यादा आदमी दिखता है
मुस्कराता हुआ जिंदादिल और भला
किसी की बात को इस तरह सुनता हुआ
एक शब्द भी अगर छूट गया
तो लानत है कान होने पर
तब जो चेहरा दिखाई देता है
और भी कम प्रतिशत आदमी होता है!
Thursday, November 14, 2013
अफसर / कुमार सुरेश
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