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Tuesday, November 19, 2013

सिर्फ मौन की लिपि है यह / आशुतोष दुबे

इबारत पूरी हो जाने के बाद भी
शेष है पँक्ति
उसमें अब अक्षर नहीं होंगे
कुछ बिन्दु होंगे.....
डगमगाते- लड़खड़ाते
वे पूर्ण विराम की खोज में हैं
हर बिन्दु का अपना अर्थ
अपनी प्रतीक्षा, अपनी पुकार
अक्षरों की इबारत के बाद और उसके बावजूद
सिर्फ मौन की लिपि है यह
ओझल हो जाएगी
जादुई स्लेट पर
देखते – देखते.

आशुतोष दुबे

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