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Sunday, November 3, 2013

नन्दा देवी-3 / अज्ञेय

तुम
वहाँ हो
मन्दिर तुम्हारा
यहाँ है।
और हम--
हमारे हाथ, हमारी सुमिरनी--
यहाँ है--
और हमारा मन
वह कहाँ है?

बिनसर, सितम्बर, 1972

अज्ञेय

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